Tuesday, June 1, 2010

दोस्‍त कफन सजाये बैठे हैं

दर्द जमाने का सीने में दबाये बैठे हैं
नीरज रोशनी से हाथ जलाये बैठे हैं
अबकि बरसात में जी भरकर रोउंगा
कितने ही पन्‍नों को दर्द सुनाये बैठे हैं
दर्द यह नहीं कि मिला दर्द ज्‍यादा है
कई अजीज दोस्‍त कफन सजाये बैठे हैं
हर पल तकदीर को हार ही मिली है
फिर भी मंजिल की आस लगाये बैठे हैं
जिनके आंखों का कभी तारा होते थे हम
वही हमें आज जनमों से भुलाये बैठे हैं

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कभी-कभी मन भर सा जाता है।

11 comments:

Etips-Blog said...

हर पल तकदीर को हार हि मिली है
फिर भी उम्मीद लागए बैठे हैँ
क्या करेँ जिन्दगी जीने का यही अन्दाज पसंद आया हमे, इसी लिऐ तो उनकी तस्वीर सीने से लगाऐ बैठे हैँ
etips-blog.blogspot.com

देव कुमार झा said...

गुरु, क्या मस्त लिखा है भाई....

दर्द जमाने का सीने में दबाये बैठे हैं
नीरज रोशनी से हाथ जलाये बैठे हैं
अबकि बरसात में जी भरकर रोउंगा
कितने ही पन्‍नों को दर्द सुनाये बैठे हैं

भई वाह वाह....

nilesh mathur said...

बहुत सुन्दर रचना!

परमजीत सिँह बाली said...

बहुत बढिया रचना है।बधाई।

Udan Tashtari said...

बेहतरीन रचना!

Shekhar Kumawat said...

http://kavyawani.blogspot.com/


aap ke dard ka raz yaha he

ना दिखा सकता ये दर्द- ए- दिल किसी को |
ना सुना सकता ये गमे दास्ताँ किसी को ||

है आखरी गुजारिश, ऐ मेरे खुदा तुझसे |
ना चाहूँ जहाँ में इस कदर फिर किसी को ||


hamare blog par bhi aap ka swagat he

दिलीप said...

जिनके आंखों का कभी तारा होते थे हम
वही हमें आज जनमों से भुलाये बैठे हैं badhiya bahut sundar

Dhiraj Tiwari said...

YE KAUN SA DARD HAI JO BANT NAHI SAKTE JABKI TUMHARE INTJAR ME PALKE BICHHAYE BAITHE HAI.

'उदय' said...

जिनके आंखों का कभी तारा होते थे हम
वही हमें आज जनमों से भुलाये बैठे हैं
...bahut sundar ... adabhut bhaav ... behad prasanshaneey, bahut bahut badhaai !!!!

vermaji said...

ओह, कितना दर्द है इस अभिव्‍यक्ति में। मैं जार जार हो गया। दर्द का इससे बेहतरीन विवरण आज तक मैंने नहीं सुना। तुम कौन हो भाई और किस दोस्‍त ने दर्द दिया है। कहीं वह कोई लडकी तो नहीं
क्‍योंकि ज्‍यादातर लोग प्रेम में धोखा खाने के बाद ही गालिब की पीढी में शामिल होते हैं।
लिखते रहो।
उफ इस नज्‍म ने मुझे मार डाला
सुरेंद्र कुमार वर्मा

vermaji said...

ओह, कितना दर्द है इस अभिव्‍यक्ति में। मैं जार जार हो गया। दर्द का इससे बेहतरीन विवरण आज तक मैंने नहीं सुना। तुम कौन हो भाई और किस दोस्‍त ने दर्द दिया है। कहीं वह कोई लडकी तो नहीं
क्‍योंकि ज्‍यादातर लोग प्रेम में धोखा खाने के बाद ही गालिब की पीढी में शामिल होते हैं।
लिखते रहो।
उफ इस नज्‍म ने मुझे मार डाला
सुरेंद्र कुमार वर्मा

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