Monday, July 19, 2010

जिंदगी

हमें जिंदगी को जीने के लिए कितने ही बंधनों को मानना होता है। भले ही हम उन बंधनों को तोडने के लिए और खुद को मुक्‍त करने के लिए पूरी ताकत लगा दें। मगर आखिर में हमें उन जंजीरों को अपने गले लगाना ही पडता है। शायद इसे ही जिंदगी कहते हैं।

2 comments:

anubhuti said...

shayad nhi yhi jindgi hai dost...........................

anubhuti said...

bahut dino bad dikhe ap..............
shikha shukla
http://baatbatasha.blogspot.com/

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