Wednesday, December 16, 2009

अनायास लिखने का मन करने लगा

आज अनायास ही कई दिन के बाद लिखने क मन होने लगा। लगा कुछ है जो मैं कहना तो चाहता हूँ, मगर कह नहीं पा रहा। येकीन मानिये, लिखने तो बैठ गया लेकिन दिमाग में बात आ ही नहीं रही की मैं कहना क्या चाहता हूँ। खैर, मेरे दिमाग क हाल छोडिये। जब याद आएगा तो बता दूंगा। मगर आपने कुछ ध्यान दिया हाल के दिनों पर। जी, माथा खुजाने की जरूरत नहीं, मैं तेलंगाना की बात कर रहा हूँ। तेलंगाना को अलग होकर देश की छाती पैर एक और राज्य का रूप ले लेना चाहिए या नहीं। हमारे नेता इस मुद्दे को सुलझा ही रहे थे की। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को न जाने कहाँ से क्या याद आ गया। अचानक बोल पड़ीं यूपी को भी काट, जगह-जगह से बाँट दो। मैं अपने ब्लॉग के माध्यम से आपसे यह जानना चाहता हूँ की इतनी तेजी यूपी के विकास में दिखतीं तो बात कुछ और होती। मगर अपना जोश उनहोंने यूपी को जोड़ने में कम तोड़ने में ज्यादा दिखाया। खैर, आखी हैं तो वे राजनेता ही। फिलहाल, मैं कुछ और कहना चाहता हूँ। आइये उस विषय की तलाश में चलते हैं। आप साथ में हैं न। मुझे आप सबकी जरूरत है। इसलिए, आइये इस आग के समान जलते मुद्दे को ठन्डे बसते में रखकर आगे बढ़ते हैं।

इधर एक मुद्दा और खूब चिंगारी छोड़ रहा है। वह हैं मुद्दा-अ-कोपेनहेगन। पहचान गये होंगे। इसमें इक बात ध्यान देने वाली है। जानते हैं क्या। कवायद दुनिया भर की और होना कुछ नहीं। जी हाँ, अब देख लीजिये। वहां की जनता जितना उफान पर है नेता उतने ही सुस्त। लोग डंडों से मरर खाने को तैयार हैं। जलवायु कको 'ठंडा' करने के लिए। मगर, मजाल है की वहां का कोई नेता अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आगे आये।

कहना और भी कुछ था मगर मैं भूल गया। माफ़ कीजिये फिर मिलूँगा.

9 comments:

अजय कुमार said...

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी टिप्पणियां दें

कृपया वर्ड-वेरिफिकेशन हटा लीजिये
वर्ड वेरीफिकेशन हटाने के लिए:
डैशबोर्ड>सेटिंग्स>कमेन्टस>Show word verification for comments?>
इसमें ’नो’ का विकल्प चुन लें..बस हो गया..कितना सरल है न हटाना
और उतना ही मुश्किल-इसे भरना!! यकीन मानिये

मनोज कुमार said...

अच्छी रचना बधाई। ब्लॉग जगत में स्वागत।

shama said...

Aakhir deshko kitna vibhajit karenge?
Behtar hoki, zile aur badhayen, banisbat ke rajy!

kshama said...

Jo anayaas likha jata hai,wahee achha lekhan hota hai!

नारदमुनि said...

man jo kahta hai wahi karo. narayan narayan

mukesh said...

yahi to hamlogo ke saath problem hai apane gusse ko thanda kar diya aur ek baat puri nahi hi dusara chhed diya.jab gussa shant ho jayega to kya karoge. jarurat hai ki gusse ko jagao aur ukhad pheko aise neta ya rajneta ko jo sale apani roti sekana chahate hai chahe desh barbad ho ham barbad ho jay to kya.

waise aapaane achha mudda uthaya hai to ise hi pura kare .ham sab aapke saath hai.

रचना गौड़ ’भारती’ said...

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई। मेरे ब्लोग पर आपका स्वागत है।

dweepanter said...

ब्लाग जगत में द्वीपांतर परिवार आपका स्वागत करता है।
pls visit
http://dweepanter.blogspot.com

dil se nikli awaz said...

Neraj ji aj maine apke blog ka- anyas hi likhne ka mann karne laga sirsak wala lekh pada. Neraj ji apne mayawati ke us bayan ke visay main kaha hai jismain unhone rajya ko teen hisso main batne wali bat kahi hai.Apke anusar mayawati ka yeh bayan rajniti se prerit hai.Lekin jaha tak main socta hoo mayawati ne pehli bar u.p ka bhala socha hai.main apko batana cahoonga ki agar app 2000 se pehle uttrakhand gaye ho or abhi hal hi main gaye ho. to apki samajh main ayega ki rajya ka batwara kitna jaroori hai. ap ek yuva patrakar hai, is per gambhirta se vichar karein.
dhanyawad

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