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बीसीसीआई इतना खेल क्‍यों कराती है

झगडा करती रहती है

वो मेरी है गीता सार

ये रात बडी ही काली है

ऐसा मुझको साथी दो

जिद अधूरी पर तमन्‍नाएं पूरी

मुझको मेरी पाती दो

कामयाबी की छाया है कुंठा

मेरे मन के अंधियारे में.....

जिंदगी

मैं अजनबी हूं

खुशी वो मुझे बेदाम दे गया

दोस्‍त कफन सजाये बैठे हैं