Thursday, May 25, 2017

आओ चलें...

तितली बनकर आओ हर सीमा पार करें
भूल हर दीवार-ओ-गम गुलिस्‍तां पार करें
उस देश की धरती जहां सभी खुशहाल रहें
आओ हम उस ग्रह पर नाम गुलजार करें
बाग बहार सब कितने भूल रहे हम सब
आओ दोस्‍त हम-तुम हर पल गुलजार करें
बिना शिकायत जो सम्‍बंधों को जी जाये
उस दुनिया की ओर चलो रफ्तार करें

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एक गुमनाम ईमानदार...

कुछ खास होकर भी वो आम रहा ईमानदारी की जिद में बदनाम रहा। उसे गैरों से कभी उम्‍मीद ही न की  वो तो अपनों में भी सिर्फ नाम रहा। ...