Wednesday, August 10, 2016

...तो दोस्‍तों से मुफ्त में गपशप कराता रहेगा एफबी

प्रभात खबर के सुरभि परिशिष्‍ट में 7 जुलाई, 2016 को प्रकाशित।
नीरज तिवारी 

फ्रेंडशिप डे पर जाहिर है सभी एक-दूसरे को विश करने के लिए मैसेज करेंगे। सोशल मीडिया के सभी प्‍लेटफॉर्म्‍स को अपडेट करेंगे। इस बीच सबसे ज्‍यादा फेसबुक हिट होगा। हो भी क्‍यों न, आखिर आज के समय में दूर रहने वाले दो अपनों को फेसबुक ही जो मिलाता है। मगर एफबी पर होने वाली दोस्‍तों से गपशप के बीच अक्‍सर ऐसा सुनने को मिलता है कि जल्‍द ही एफबी अपने हर यूजर्स से रुपये चार्ज करेगा। आए दिन अफवाहों से लबरेज ऐसे मैसेज भी पढ़ने और सुनने को मिलते हैं। ऐसे में ‘प्रभात खबर’ के इस अंक में हम आपको बताएंगे कि एफबी कभी अपने यूजर्स से कोई रुपया चार्ज नहीं करेगा क्‍योंकि उसकी कमाई का जरिया अपनों से मिलाना ही नहीं बल्‍कि विज्ञापन व उससे संबंधित अन्‍य काम हैं। आइये, इस बारे में तफ्शील से समझने की कोशिश करते हैं...


1.     विज्ञापन
एफबी की कमाई का मुख्‍य स्रोत विज्ञापन है। इस सोशल मीडिया के माध्‍यम से बड़ी संख्‍या में नामी कंपनियां भी अपना प्रचार कर मुनाफा बटोर रही हैं। यह अपने यूजर्स के लाइक किए गए ब्रांड को ध्‍यान में रखकर उनकी पसंदीदा कंपनी के नए प्रोडक्‍ट्स आदि के बारे में उनके होम पेज के दायीं ओर विज्ञापन प्रसारित करता रहता है। यह यूजर्स की एक्‍टिविटी के मुताबिक भी उनकी होम पेज पर विज्ञापन दिखाता है। इसके एवज में वह उक्‍त कंपनियों से चार्ज वसूल करता है और यूजर बिना कुछ खर्च किए नए-नए उत्‍पादों से अपडेट होता रहता है। यहां यह जानना जरूरी है कि एफबी पर गूगल की तरह ‘क्‍लिक एंड हिट’ के फॉर्मूला पर कमाई नहीं किया जाता। यानी आपके वही विज्ञापन दिखाया जाता है, जिसमें आपकी दिलचस्‍पी हो। यानी यदि किसी को घूमना पसंद है तो उसके होम पेज पर ट्रेवल कंपनियों के विज्ञापन दिखाये जाते हैं। बता दें कि फोर्ड, एचएसबीसी, सैमसंग, ग्रुपॉन व अमेरिकन एक्‍सप्रेस सहित कई नामी कंपनियां एफबी को भारी रकम देकर अपना प्रचार करवा रही हैं।

वहीं, एफबी पर विज्ञापन का दूसरा तरीका ‘सेल्‍फ सर्विंग ऐड्स’ है। यानी यूजर अपना विज्ञापन स्‍वयं बनाकर उसे एफबी की मदद से प्रचारित करता है। यूजर्स का एक बड़ा तबका इस तरह से एफबी की कमाई का स्रोत बना हुआ है। हालांकि, इस तरह से प्रचार करवाने वालों में छोटे व्‍यापारियों की संख्‍या ज्‍यादा है।  

2.     मोबाइल विज्ञापन
एफबी की ओर से हाल में जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, वह अपनी कमाई का एक तिहाई हिस्‍सा मोबाइल विज्ञापन से करता है। हाल ही में एफबी ने एप्‍पल की तरह खुद का एप्‍प सेंटर भी लांच किया है, जिसकी मदद से कोई भी अपने मोबाइल में मनचाहा एप्‍प डाउनलोड कर सकता है। इसके बदले में एप्‍प को बनाने वाले एफबी को फीस देते हैं। इस एप्‍प सेंटर में लोगों को एडमॉब और आईएड की मदद से विज्ञापन देने के लिए निमंत्रण भी दिया जाता है।
3.     विज्ञापन के अलावा कमाई के अन्‍य मार्ग
एफबी इन दिनों गेम्‍स, गिफ्ट शॉप, फेसबुक क्रेडिट्स और कुछ फीचर एप्‍लीकेशन के जरिये भी कमाई कर रहा है। इनके बारे में भी विस्‍तार से समझने की कोशिश करते हैं...
क.  फेसबुक गेम्‍स
एफबी पर इन दिनों फार्मविले, माफिया वार्स, सिटी विले, एम्‍पायर व अलाइस जैसे कई गेम्‍स यूजर्स के सिर चढ़कर ख्‍याति बटोर रहा है। खास बात यह है कि एफबी पर इन गेम्‍स को खेलने के लिए करोड़ों लोग शुल्‍क भी मुहैया कराते हैं। यह सभी खेल ‘जिंगा’ नाम के एक डेवलपर ने बनाए हैं। एफबी इस कंपनी से 30 फीसदी बतौर फीस वसूल करता है।

ख.  फेसबुक गिफ्ट शॉप
ऑनलाइन मार्केटिंग की तर्ज पर एफबी पर भी गिफ्ट्स आदि का कारोबार किया जाता है। इसके लिए एफबी ने बाकायदा थर्ड पार्टी से समझौता तक कर रखा है। इसमें दोस्‍त एक-दूजे को गिफ्ट्स भिजवाते हैं। इसके लिए एफबी ने कई तरह के उत्‍पाद बनाने वाली कंपनियों आदि से समझौता कर रखा है। इसके तहत एफबी अपने यूजर्स के ऑर्डर मसलन खिलौने, जन्‍मदिन व अन्‍य अवसरों पर बांटे जाने वाले कार्ड आदि का कारोबार करता है। यानी फ्रेंडशिप डे के अवसर पर जब आप अपने दोस्‍तों के लिए अपने एफबी अकाउंट के जरिए गिफ्ट ऑर्डर कर रहे होंगे तो उधर एफबी की कमाई बढ़ती जाएगी। यहां यह जानना जरूरी है कि एफबी पर ऑर्डर बुक होने के बाद उसे आपके दोस्‍त तक पहुंचाने का जिम्‍मा इसी सोशल मीडिया कंपनी का होता है।

ग.   फेसबुक क्रेडिट्स
एफबी के कमाई के स्रोतों में फेसबुक क्रेडिट्स का अहम योगदान होता है। यह एफबी पर गिफ्ट्स खरीदने या गेम्‍स खेलने के लिए यूजर्स को आसानी से भुगतान कर कमाई करने का माध्‍यम है। यानी एफबी जब आपको क्रेडिट के माध्‍यम से कुछ भुगतान करता है तो उसके बदले में वह आपसे कमाई करता है।

...तो अब आप सभी इस बात को तो बेहतरी से जान चुके हैं कि एफबी कभी भी आपसे आपके दोस्‍तों को मिलवाने के एवज में रुपये नहीं वसूलेगा क्‍योंकि उसने अपनी कमाई का स्रोत विज्ञापन आदि को बना रखा है। अब देर न कीजिए इस दिलचस्‍प सोशल नेटवर्किंग मीडिया का इस्‍तेमाल कर अपने दोस्‍तों को मजेदार वीडियोज, स्‍टेटस व फोटोग्राफ्स में टैग कर ‘हैप्‍पी फ्रेंडशिप डे’ की शुभकामनाएं दीजिए।
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कुछ जानकारी एफबी के बारे में...
यह तो सभी जानते हैं कि एफबी वर्तमान में लोगों को सोशल मीडिया का चस्‍का लगाकर बड़ी तेजी से तरक्‍की करने वाला कारोबार है। कुछ समय पहले एक अफवाह ने जोर पकड़ा था कि एफबी एक पेड मेम्‍बरशिप साइट है। मगर एफबी की ओर से एक आधिकारिक बयान जारी करके इस अफवाह को सिरे से खारिज किया गया था। आज भी एफबी पर मुफ्त में अपनों से चैटिंग कर लोग दूरियों को भुलाकर अपना दर्द व खुशी को साझा करते हैं। वर्ष 2004 में मार्क जुकरबर्ग ने इस सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट की शुरुआत की थी। आज की तारीख में इसके एक अरब से भी ज्‍यादा यूजर्स हैं। साथ ही, दुनियाभर में लोगों के मनोरंजन करने का सबसे पसंदीदा सोशल मीडिया बना हुआ है। वहीं, इसका लोग व्‍यक्‍तिगत और प्रोफेशनल दोनों तरीके से इस्‍तेमाल कर चौबीसों घंटे रिश्‍ते बनाने और कमाई करने में व्‍यस्‍त रहते हैं।
एफबी को लोगों में बढ़ती दिलचस्‍पी को देखते हुए 70 से अधिक भाषाओं में उपलब्‍ध कराया जाता है। यानी यह किसी वर्ग विशेष के लिए ही नहीं बल्‍कि कई भाषायी समुदायों के लिए बनाया गया है। यही कारण है कि इसके यूजर्स की संख्‍या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। आज की तारीख में एफबी पर आपके नाम का पेज होना एक आवश्‍यकता सी बन गई है। इसमें कंपनी की ओर से अपने हर यूजर की जानकारियों को पूरी सुरक्षा के साथ डाटाबेस में अपडेट किया जाता है। इस अभेद सुरक्षा को देखकर ही लोग अपने विचारों, वीडियोज और तस्‍वीरों को लोगों के बीच साझा कर अपना संदेश सब तक पहुंचाते हैं। एफबी पर लोगों की बढ़ती संख्‍या को देखते हुए कई ऑनलाइन बिजनेस करने वालों ने एफबी पर अपनी सक्रियता को बढ़ाकर विज्ञापन आदि के जरिये कमाई बढ़ा रहे हैं। वहीं, कमोबेश सभी वेबपोर्टल्‍स ने अपनी साइट पर यूजर्स का ट्रैफिक बढ़ाने के लिए एफबी की सदस्‍यता ले रखी है।
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आंकड़ों में समझें एफबी का मुनाफा
1.     एफबी ने अप्रैल-जून तिमाही के जो नतीजे घोषित किए हैं, उसमें बताया गया है कि कंपनी को पिछले वर्ष के मुकाबले 186 प्रतिशत ज्‍यादा मुनाफा हुआ है।
2.     कंपनी ने एफबी, व्‍हाट्सएप्‍प, मैसेंजर और इंस्‍टाग्राम के दुनियाभार के 471 करोड़ यूजर्स के जरिये एक लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा का कारोबार किया है।
3.     तिमाही मुनाफा 100 करोड़ से 200 करोड़ डॉलर तक पहुंचाने के मामले में फेसबुक ने गूगल को पछाड़ दिया है। यह आंकड़ा पार करने में कंपनी को सिर्फ छह माह ही लगे जबकि गूगल को साढ़े तीन साल लगे हैं।
4.     बेहतर मुनाफा कमाने से एफबी का शेयर 7 फीसदी उछला है। अब कंपनी का मार्केट कैप 24 लाख 79 हजार करोड़ रुपये के पार हो गया है। ऐसे में एफबी अमेरिका की लिस्‍टेड कंपनियों में मार्केट कैप के हिसाब से चौथी बड़ी कंपनी में शुमार हो चुकी है।
5.     एफबी के मुताबिक, एफबी पर रोज 100 करोड़ पोस्‍ट डाली जाती है। इस पर रोज 800 करोड़ वीडियोज देखे जाते हैं और यूजर्स प्रतिदिन 10 करोड़ घंटे के वीडियो देखते हैं।


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चंद दोस्‍तों की दोस्‍ती की बुनियाद से हुई थी फेसबुक की शुरुआत

कोई नहीं जानता था कि मार्क जुकरबर्ग की एक छोटी सी कोशिश आज विश्‍व का सबसे पसंदीदा सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट का रूप धारण कर लेगा। एफबी की शुरुआत मार्क ने तब की थी जब वे हार्वर्ड में कंप्‍यूटर साइंस के छात्र थे। उनकी की खोज में उनके साथ पढ़ाई कर रहे एडुवर्डो सैवरिन, डस्‍टिन मोस्‍कोविट्ज और क्रिस हग्‍स ने भी साथ रहे थे। यानी आज की तारीख में दोस्‍तों को मिलाने का सबसे बड़ा प्‍लेटफार्म बनने के पीछे भी चंद दोस्‍तों की महत्‍वाकांक्षी सोच रही है। हालांकि, जब इसकी शुरुआत हुई थी तब इसका नाम फेसमैन रखा गया था। उस समय मार्क द्वितीय वर्ष के छात्र थे जब इसकी नींव रखी गई थी। हालांकि, उस समय के फेसमैन में तब कॉलेज कैम्‍पस के छात्रों की दो तस्‍वीरों को जोड़कर एक ऑनलाइन गेम खेला जाता था। जिसमें, अन्‍य छात्र यह टैग देते थे कि दोस्‍तों की यह जोड़ी ‘हॉट’ है या ‘नॉट’ है। देखते ही देखते यह ख्‍याति बटोरने लगा। मगर इसी बीच उनकी इस मुहिम को तब करारा झटका लग गया जब उनपर कॉलेज के डाटाबेस को हैक कर छात्र-छात्राओं की तस्‍वीरों को चुराकर फेसमैन पर प्रसारित करने का आरोप लगने लगा। यह आरोप लगते ही फेसमैन को 28 अक्‍टूबर 2003 को लांच करने के कुछ दिनों के बाद ही बंद करना पड़ गया था। हालांकि, इस बीच फेसबुक की नींव पड़ चुकी थी। बस, अब उसे दोबारा लांच करने के लिए जुकरबर्ग हर तरह की जुगत में मशगूल हो गए। वहीं, डाटा चुराने के गंभीर आरोप लगने के बाद जुकरबर्ग को कॉलेज से निष्‍काशन भी झेलना पड़ा। मगर कुछ दिनों के बाद ये सारे आरोप बेबुनियाद साबित हुए और जुकरबर्ग हर इल्‍जाम से बरी हो गये।
इसी के साथ 4 फरवरी 2004 को जुकरबर्ग ने ‘दफेसबुक’ के नाम से लांच कर दिया। सभी दोस्‍तों के बीच एक बार फिर खुशी की लहर दौड़ पड़ी। मगर बदकिस्‍मती ने यहां भी पीछा नहीं छोड़ा। नई वेबसाइट की लांचिंग के मात्र छ: दिनों के बाद ही जुकरबर्ग पर हार्वर्ड में पढ़ाई कर रहे उनके तीन वरिष्‍ठ छात्रों कैमरॉन विंकलोव्‍स, टायलर विंकलोव्‍स और दिव्‍य नरेंद्र ने उनके आइडिया को चुराकर यह वेबसाइट लांच करने का आरोप जड़ दिया। आरोप में कहा गया था कि जुकबर्ग ने अपने दोस्‍तों के साथ मिलकर उनके ‘हार्वर्ड कनेक्‍शन’ नाम के वेबपोर्टल की कॉपी तैयार की है। हालांकि, काफी जद्दोजहद के बाद कोर्ट के बाहर इस पूरे मामले का निपटारा किया गया। इसमें तय किया गया कि कॉलेज का कोई भी छात्र दफेसबुक का सदस्‍य नहीं बनेगा। इसके बाद जुकरबर्ग ने अपने दोस्‍त एडुवर्डो सैवरिन को इसके लिए पूंजी एकत्र करने, डस्‍टिन मोस्‍कोविट्ज को बतौर प्रोग्रामर, एंड्रू मैक्‍कुलम पर ग्राफिक आर्टिस्‍ट का जिम्‍मा डालकर इसे व्‍याप्‍क रूप देने में व्‍यस्‍त हो गए। धीरे-धीरे यह वेबसाइट अपने क्षेत्र के हर कॉलेज व युनिवर्सिटीज में विख्‍यात हो गई।
साल 2004 में ही सीन पार्कर नाम के एक शख्‍स ने इस साइट को फाइनेंस किया। वह कंपनी का प्रसीडेंट बन गया। कंपनी का नाम बदलकर ‘फेसबुक’ कर दिया गया। इसकी ख्‍याति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2005 में इस कंपनी का डोमेन नेम फेसबुक डॉट कॉम खरीदने के लिए दो लाख डॉलर का भुगतान करना पड़ा था। मुनाफा कमाने के बाद जुकरबर्ग ने सभी प्रकार के भुगतान कर कंपनी का सीईओ का पद हासिल कर लिया।
आज आलम यह है कि यूजर एफबी की सेवा या एप्‍प पर जो भी वीडियो या विज्ञापन देखता है, इससे कंपनी की कमाई होती है। कंपनी ने एफबी, व्‍हाट्सएप्‍प, मैसेंजर व इंस्‍टाग्राम के हर यूजर से 256 रुपये यानी 471 करोड़ यूजर्स से तकरीबन एक लाख करोड़ रुपये कमाकर कई रिकॉड्र्स ध्‍वस्‍त कर दिए हैं।


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