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अभी मुझको तपना है...

उर्दू के विकास में मिर्जा हादी रूसवा का अमूल्य योगदान

दोहन के दंश से छटपटाते श्रमिकों का दिन है आज

मौलाना हसरत मोहानी ने इंकलाब जिंदाबाद का दिया नारा

ऐसी मुझको मदिरा दो

देखा तुमने......मुझे जीना आता है

छोटे बिल्डर्स ने जीता विश्वास

कब आएगी तमीज????

मुझे आज भी इंतजार है....

छिछले 'विश्वास' की 'कांग्रेस कुमार' को छिछली चुनौती

अखबार मुस्कुरा रहा था, लोकतंत्र घबड़ा रहा था

साजी, जांबाजी और अब अंदाजी ने छोड़ा साथ

बिल्‍ली शेर को खा गई, वो बदकिस्‍मती को भा गई