आज संवारो कल खुद बेहतर हो जाएगा

आज की नींव पर ही कल की बुनियाद टिकी है। हम आज अपनी नींव को जितना ही मजबूत करते जाएंगे हमारा कल खुद ब खुद संवरता जाएगा। हम भविष्य में सब अच्छा हो जाएगा की आस में ही जीते हुए सब कुछ समय आने पर करेंगे सरीके बहानों से सफलता अर्जित नहीं कर सकते। हमें मनचाहे भविष्य को  हासिल करने के लिए आज ही कोई मजबूत कदम उठाना होगा।
यह बिलकुल आज बीज बोओ और कुछ सालों के बाद फल खाओ की नीति पर आधारित होता है। हालांकी, समय के साथ ही अपनी सोच को बदलते रहना और उचित कदम उठाना बहुत जरूरी है। कई बार हम अपनी हार के लिए परिस्थितियों और परिवेश को जिम्मेदार ठहराते हुए वक्त से समझौता कर लेते हैं। मगर सफलता अर्जित करने की चाह रखने वाले ऐसी दिक्कतों को अनदेखा कर परिस्थितियों को समझौता करने पर मजबूर कर देते हैं। वे अपनी जीत का  श्रेय यदि खुद को देते हैं तो अपनी हार का सेहरा भी स्वीकारने से परहेज नहीं करते। ऐसे में बेहतर है कि अपना कल बेहतर करने के लिए आज ही कोई उचित कदम उठाएं ताकि आने वाले दिनों में आपको बिताए हुए कल पर अफसोस न करना पड़े। इतिहास गवाह है कि सफलता के शिखर पर पहुंचने वालों ने कभी परिस्थितियों का दास बनने की नहीं सोची। उन्होंने सदैव ही परिस्थितियों को देखते हुए अपने कदम उठाए और बेहतर कल की नींव रख दी। इसीलिए बेहतर है कि मायूस होकर समय को कोसने के बजाए अपनी मंजिल की ओर हुंकार भरते हुए कदम बढ़ा दिया जाए।
अब चलते-चलते समाचार से हटकर। चमत्कार को नमस्कार करने वाली मीडिया का भी कोई जवाब नहीं। कोई नामी हस्ती आंदोलन करे तो 'सपोर्ट अन्नाÓ का  नारा देने वाली मीडिया को किसी युवा की भूख हड़ताल नहीं दिखाई देती। नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे असीम त्रिवेदी और आलोक ने केंद्र सरकार की साजिश के खिलाफ भूख हड़ताल शुरू की। वे आई-टी एक्ट 2011 में सरकार द्वारा गुपचुप तरीके से संशोधन करके अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पर काटने पर तुले हुए षड्यंत्र के खिलाफ भूख आदंदोलन कर रहे हैं। ये दोनों ही युवा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ हो रही इस साजिश के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। मगर मीडिया इनके चमत्कार को नमस्कार नहीं कर रही है। वहीं, मीडिया कवरेज न देखते हुए नामचीन लोग भी इस मुहिम से नहीं जुड़ रहे हैं।

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