Thursday, September 30, 2010

वो मेरी है गीता सार

वो मेरी है गीता सार
शीतल झरने की शीतल धार
संग रहे जो भव के पार
वो है मेरी प्राण प्रिये।
फूलों जैसी वो कोमल है
वायु जैसी वो चंचल है
बाल उसके मलमल हैं
वो है मेरी प्राण प्रिये।
सब उस पर न्‍यौछावर है
उसका मन सरोवर है
प्रकृति उसके जेवर हैं
वो है मेरी प्राण प्रिये।
कोयल जैसी जो गाती है
किरणों संग नहाती है
सपनों में मेरे आती है
वो है मेरी प्राण प्रिये।
वो मेरी शक्ति है
निश्‍छल उसकी भक्ति है
हर पल राह वो तकती है
वो है मेरी प्राण प्रिये।
नहीं उससा कोई तर्ज
उसकी इच्‍छापुर्ति मेरा फर्ज
कभी कम न होगा उसका कर्ज
वो है मेरी प्राण प्रिये।
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Thursday, September 23, 2010

ये रात बडी ही काली है

दिखता दूर सवेरा है
अंधियारे ने घेरा है
ये कालचक्र का फेरा है
ये रात बडी ही काली है।
इक ज्‍योति का तम में साथ
सिर पर मेरी मां का हाथ
चला करूं मैं सारी रात
ये रात बडी ही काली है।
साथ में न कोई दिखता है
मन तो रात में बिकता है
फिर जीने का जी करता है
ये रात बडी ही काली है।
मेरे मन को डर है सता रहा
साहस के गीत सुना रहा
पर अंधियारा है डरा रहा
ये रात बडी ही काली है।
तम पार करूं मैं दो वरदान
न खो जाउं जरा भी ज्ञान
ठोकर से न टूटे ध्‍यान
ये रात बडी ही काली है।
अंधियारे को पार किया
लोभ अधर्म न लिया दिया
समंदर जैसा किया-किया
ये रात बडी ही काली है।

Sunday, September 19, 2010

ऐसा मुझको साथी दो

सौर उर्जा सा ताजा हो
जिसकी बडी अभिलाषा हो
मिठी-मिठी भाषा हो
ऐसा मुझको साथी दो।
दुख में जो गाता जाए
हर पल जो भाता जाए
साथ सदा जाता जाए
ऐसा मुझको साथी दो।
प्रेम का जिसको होवे ज्ञान
मेरे सपनों को जो दे मान
मेरे अपनों का जो दे ध्‍यान
ऐसा मुझको साथी दो।
सांसों में जिसके हो गर्मी
चरित्र की हो धर्मी-कर्मी
पर बातों में होवे नर्मी
ऐसा मुझको साथी दो।
प्रेम का जो सम्‍मान करे
प्रेम खुशी से दान करे
साथ देने का मान करे
ऐसा मुझको साथी दो।
ढुंढ रहा जाने कब से
मैं मांग रहा जिसको हक से
पाउंगा उसको तप से
ऐसा मुझको साथी दो।

हिचकारा : लखनऊ का अश्‍लील और गौरवपूर्ण काव्‍य प्रेम

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।                                                          साभार: गूगल इमेज।     आइए जानें लखनऊ का विशाल इतिहास। ह...