Sunday, August 29, 2010

जिद अधूरी पर तमन्‍नाएं पूरी

एक रोज मुझे वो मिल गई
मैं हंसा तो वो खिल गई
बात हुई और रात गई
जिद में मैंने इक बात कही
वो पूछ उठी हिचकी ले के
मैं सहम गया बिन शब्‍द कहे
उनमें जिद अधूरी थी पर तमन्ना पूरी थी
फिर भी थोडी हिम्‍मत कर के
मैं कह बैठा उस बचपन से
तुम बात कहो, मैं खो जाउं
तुम बाल ढंको, मैं सो जाउं
फिर वो मुझ पर हंसती थी
उसे देख मैं लरकता था
जब भी मेरी आंख खुले
मैं उसके लिए तडपता था
पर कह न सका मैं दिल की बात
कि उसे चाह रहा हूं मैं दिन-रात
मेरी जिद बात करने की थी
वो मुझसे बात करे हंसकर
मैं बहक गया इक दिन उस पर
कि कह बैठा मैं दिल की बात
कि चाह रहा उसे दिन-रात
उसने उसे मजाक कहा
उसने तुम की जगह फिर आप कहा
मैं टूट गया शीशे जैसा
टुकडे-टुकडे हीरे जैसा
फिर उसने हाथ बढाया था
पर उसे चुभ गए मेरे जजबात
मैं फिर से आज अकेला हूं
तन्‍हाई का मेला हूं
फिर उसको बंधन मुक्‍त किया
जिसको अपना था जिया दिया
वो जहां रहे बस खुश रहे
अब यही जिद मेरी दिन-रात
मेरी जिद अधूरी थी पर तमन्‍ना पूरी थी......
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Wednesday, August 18, 2010

मुझको मेरी पाती दो

जिनमें मेरे सपने थे
मेरे नहीं वे अपने थे
वादे जिनमें तपने थे
मुझको मेरी पाती दो।
अश्रुधारा संग लिखा हुआ
हृदय भाव से भरा हुआ
जीवन जिनसे मधुर हुआ
मुझको मेरी पाती दो।
जिनको छुपकर लिखा गया
दर्द जिनमें दिखा गया
क्‍यों उनको तू भूल गया
मुझको मेरी पाती दो।
जिनमें प्रेम की शिक्षा थी
हम दोनों की इच्‍छा थी
बस प्रेम दो की भिक्षा थी
मुझको मेरी पाती दो।
तू तो मुझको छोड गया
रिश्‍ते-वादे तोड गया
मुझसे रस्‍ता मोड गया
मुझको मेरी पाती दो।
उनपर मेरा है अधिकार
रग में शब्‍दों का संचार
जीवित मन में वे विचार
मुझको मेरी पाती दो।
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Monday, August 2, 2010

कामयाबी की छाया है कुंठा

कामयाबी शब्‍‍द दिल में उजाले को जन्‍मा देती है। बडी बेसब्री से लोग करते हैं इसका इंतजार। कोई एक साल, कोई दो साल, कोई सालों साल तो कोई कुछ पल। मगर इंतजार की इस परीक्षा से सभी कामयाब लोगों को ए‍क बार गुजरना पडा है। हां, इस बीच उन पर, हम पर और सब पर एक साया जरूर छा जाता है। उस छाए हुए साया का नाम है कुंठा। जी हां, कुंठा कामयाबी की छाया है। बशर्ते हम उसे खुदपर हावी न होने दें। उससे लडें, झगडें और मजबूर कर दें कि वह जाए और कामयाबी आए। मगर अफसोस है कि इस प्रतिस्‍पर्धा में कुंठा कामयाबी को लोगों से दूर करती जा रही है। इसलिए मेरी सलाह है कि इस कुंठा को दिल से निकालकर कामयाबी को पाने की कोशिश करें।

एक गुमनाम ईमानदार...

कुछ खास होकर भी वो आम रहा ईमानदारी की जिद में बदनाम रहा। उसे गैरों से कभी उम्‍मीद ही न की  वो तो अपनों में भी सिर्फ नाम रहा। ...